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शुक्रवार, 3 नवंबर 2017

गुरु पर्व / प्रकाश पर्व/ गुरु नानक जयंती

गुरु पर्व / प्रकाश पर्व/ गुरु नानक जयंती 
सत श्री अकाल :: ਸਤਿ ਸ੍ਰੀ ਅਕਾਲ

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          पंचांग के अनुसार गुरु नानक देव जी की जयंती कार्तिक मास की  पूर्णिमा को मनायी जाती है (कार्तिक महीने का अंतिम दिन ) जबकि अंग्रेज़ी कैलेंडर के अनुसार उनका जन्म  15 अप्रैल 1469 को हुआ था। सिख धर्म के संस्थापक प्रथम गुरु बचपन से ही अध्यात्म की ओर मुड़ गए थे।  उन्होंने बिना संन्यास धारण किये ही ईश्वरीय मार्ग को चुना और स्थापित किया कि मन की पवित्रता ही सत्य और ईश्वर के निकट ले जाती है। 

          गुरु नानक देव जी  का व्यक्तित्व एवं कृतित्व एक समाज सुधारक , दार्शनिक , कवि ,पथ प्रदर्शक , देशप्रेमी और गृहस्थ जीवन में रहकर सद्मार्ग पर चलने वाला, आडम्बरविहीन जीवन जीने वाला सच्चा ईश्वर का सेवक  का है जो उन्हें देव तुल्य बनाता है। धार्मिक कट्टरता और रूढ़ियों से परे उन्होंने समाज में शांति और पवित्रता की स्थापना के लिए अपना समूचा जीवन होम दिया। आज भारत से लेकर विश्वभर में सिख धर्म की चर्चा है जोकि विश्वबंधुत्व का विराट विचार सम्प्रेषित करता है।  समाज में प्रेम और सद्भाव को बढ़ावा देता है।  सिख धर्म सनातन धर्म से निकली सुंदर ,चमत्कृत ,पवित्र शाखा है जोकि अपना स्वतंत्र अस्तित्व रखती है जिस पर भारतीय संस्कृति गर्वोन्नत है।

           सिख धर्म में पवित्र ग्रंथ "गुरु ग्रंथ साहिब" की पूजा की जाती है जिसमें गुरुओं की पवित्र वाणी का संग्रह है। आज से दो दिन पूर्व गुरुद्वारों और घरों में गुरु ग्रंथ साहिब का अखंड पाठ आरम्भ हो जाता है और एक सप्ताह पूर्व ( गुरु नानक जयंती के दिन से ) प्रभात फेरी निकलना आरम्भ हो जाती है। आज प्रकाश पर्व के दिन उत्सव का माहौल होता है।  आज के दिन "निशान साहिब" और "पंच प्यारों" की झांकी निकलती है बड़ी धूमधाम के साथ , ढोल नगाड़े ,बैंड बाज़ों के साथ, नगर कीर्तन के साथ । तलवारबाज़ी के करतब भी दिखाए जाते हैं। 
सिख धर्म के दशवें गुरु  गुरु गोविन्द सिंह जी ने खालसा पंथ की स्थापना की जिसमें सिख धर्म की विधिवत दीक्षा लेना और अमृत चखना आदि का प्राधान्य है। दीक्षा ( नाम लेना / गुरु मन्त्र  ) लेने वाले को केश ,कंघा ,कड़ा ,कृपाण और कछेरा (कछा ) धारण करना अनिवार्य माना  जाता है। 
              गुरु नानक साहिब जी के उपदेश जीवन को सफल बनाए जाने को प्रेरित करते हैं।  परिवार ,समाज, देश और दुनिया में प्रेम और भाईचारे को बढ़ावा देने वाले उनके विचार सदैव नई रौशनी बिखेरते रहेंगे।
विश्वभर में आज प्रकाश पर्व की धूम दिखाई देती है। श्रद्धालु  बढ़-चढ़कर इस उत्सव में भाग लेते हैं। 


मन मूरख अजहूं नहिं समुझत, सिख दै हारयो नीत।

नानक भव-जल-पार परै जो गावै प्रभु के गीत॥

                                     #रवीन्द्र सिंह यादव